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आयुर्वेद के अनुसार रोटी व चावल में क्या लाभप्रद है ?

Created by Asttrolok in Ayurveda 30 Aug 2023
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आयुर्वेद के अनुसार रोटी व चावल में क्या लाभप्रद है ?
हमारे देश में अधिकांश लोग भोजन में रोटी या चावल या फिर दोनों चीजें ग्रहण करते हैं । किन्तु बहुत से लोगों को इस बारे में सही जानकारी नहीं होती है कि उनके शरीर के लिए रोटी और चावल में क्या खाना अधिक लाभप्रद व स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहतर रहेगा । कुछ लोगों के मन चावल या रोटी को लेकर कुछ भ्रांतियाँ भी होती हैं जैसे  चावल खाने से शरीर में मोटापा बढ़ जाता है । ऐसी ही कुछ अन्य भ्रांतियाँ रोटी को लेकर भी होती हैं । आज के लेख में हम आयुर्वेद की मदद से यह समझेंगे कि चावल और रोटी में स्वास्थ्य के लिया क्या अच्छा होता है ? साथ ही किन लोगों को रोटी और किन लोगों को चावल खाना चाहिए ?

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आयुर्वेद में धान्य के प्रकार -


आयुर्वेद में अन्न को दो भागों में विभाजित किया गया है - 

  1.  - शूक धान्य वर्ग 
  1.  - शिंबी धान्य वर्ग 

शूक धान्य वर्ग -


शूक धान्य वर्ग में गेंहू , बाजरा , चावल , मक्का आदि पदार्थ शामिल किये गए हैं । 


शिंबी धान्य वर्ग -


शिंबी धान्य वर्ग में सभी प्रकार की दालों को रखा गया है । जिसमें मसूर की दाल  , चना की दाल  , अरहर की दाल  , मूंग की दाल आदि दालें शामिल हैं ।

अब हम यह समझ लेते हैं कि किसी व्यक्ति को भोजन में गेंहू या चावल का चुनाव करते समय आयुर्वेद में बताई गई कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए । 


भोजन में किस प्रकार का चावल लेना चाहिए ?


अपने आसपास की मिट्टी में उगाया गया चावल खान आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए अच्छा बताया गया है । आयुर्वेद में यह भी बताया गया है कि जो चावल 60 दिन में पक कर तैयार होता है वह शरीर के लिए लाभप्रद होता है । इसके अलावा लाल रंग के चावल को भी आयुर्वेद में खाने योग्य माना गया है । पुराना चावल पाचन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है इसलिए जो लोग चावल खाते हैं वो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आप लगभग 1 साल पुराना चावल ही खाएं । 

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चावल पकाने की विधि -


चावल पकाने के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए । प्रेशर कुकर में पकाया गया चावल शरीर में कई विकारों को आमंत्रित करता है जिसमें कफ दोष का बढ़ना व मधुमेह  प्रमुख विकार है । इसलिए चावल को खुले बर्तन में सामान्य से अधिक पानी डालकर पकाना चाहिए । ऐसा चावल पाचन क्रिया के लिए बहुत अच्छा रहता है , साथ ही किसी तरह के विकार उत्पन्न नहीं करता है । 

आयुर्वेद के अनुसार गेंहू के गुण -


गेंहू को आयुर्वेद में गुरु कहा जाता है यानि यह भारी खाद्य पदार्थ माना जाता है जिसको पाचन में बहुत अधिक समय लगता है । गेंहू से बने पदार्थ जैसे रोटी आदि का सेवन करने से व्यक्ति के शरीर में आलस्य व शिथिलता देखने को मिलती है । इसके कुछ फायदे भी हैं । रोटी खाने से शरीर में वात दोष व पित्त दोष में कमी आती है । इसके अलावा यह शरीर को अधिक पोषक तत्व प्रदान करती है । 

रोटी बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें -


रोटी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गेंहू के आटे को छानना नहीं चाहिए ,इससे उसके पोषक तत्वों में कमी आ जाती है । साथ ही गेंहू से बनने वाले तले हुए पदार्थों जैसे पूड़ी या पराठे की जगह रोटी खाना अधिक लाभप्रद माना गया है। 

निष्कर्ष -


आयुर्वेद के अनुसार हमने रोटी व चावल के सम्पूर्ण गुणों का विश्लेषण किया । आयुर्वेद में खाद्य पदार्थों के सेवन के लिए एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है, वो है -देशसात्मय । इसका अर्थ है कि हमारे देश या हमारे क्षेत्र में जो अन्न अधिक उगाया जाता है वही हमारे लिए अधिक लाभप्रद होता है । जैसे उत्तर भारत में गेंहू अधिक उगाया जाता है तो वहीं दक्षिण भारत में चावल अधिक उगाया जाता है । रोटी या चावल का चुनाव करते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए । 

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