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नवरात्रि का पाँचवाँ दिन: माँ स्कंदमाता की पूजा, कथा और दिव्य आशीर्वाद

Created by Asttrolok in Astrology 20 Mar 2026
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नवरात्रि का पाँचवाँ दिन: माँ स्कंदमाता की पूजा, कथा और दिव्य आशीर्वाद

नवरात्रि का हर दिन अपने आप में खास होता है, लेकिन पाँचवाँ दिन एक अलग ही शांति लेकर आता है। सुबह-सुबह जब घर में पूजा की तैयारी होती है, अगरबत्ती की खुशबू फैलती है और मन अपने आप शांत होने लगता है वहीं से इस दिन की असली शुरुआत होती है।

कई लोग माँ स्कंदमाता की पूजा तो करते हैं, लेकिन मन में सवाल रहता है सही विधि क्या है, इसका महत्व क्या है, और इससे जीवन में क्या बदलाव आता है? एक ज्योतिषी के अनुभव से कहूँ, तो यह दिन सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि अपने मन और जीवन को संतुलित करने का अवसर है।

माँ स्कंदमाता का स्वरूप और पहचान

माँ दुर्गा का पाँचवाँ रूप स्कंदमाता है। ये भगवान कार्तिकेय की माता हैं और उनकी गोद में बाल रूप में स्कंद विराजमान रहते हैं। इस स्वरूप में माँ कमल पर बैठी होती हैं और सिंह उनका वाहन है। यह रूप हमें सिखाता है कि शक्ति और ममता एक साथ कैसे काम करती हैं। जीवन में भी जब कठोर फैसले लेने हों, तब मन में करुणा और संतुलन दोनों होना जरूरी है।

स्कंदमाता की कथा और महत्व हिंदी में

कथा के अनुसार, जब देवताओं को एक ऐसे सेनापति की जरूरत थी जो असुरों का अंत कर सके, तब भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ। माँ स्कंदमाता ने उन्हें न केवल जन्म दिया बल्कि उन्हें सही दिशा और शक्ति भी दी। इस कथा को अगर आज के जीवन से जोड़ें, तो यह साफ समझ आता है कि सही मार्गदर्शन के बिना शक्ति भी अधूरी है। यही कारण है कि स्कंदमाता का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा हुआ है।


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स्कंदमाता पूजा कैसे करें (सरल विधि)

अगर आप सोचते हैं कि पूजा के लिए बहुत ज्यादा सामग्री चाहिए, तो ऐसा नहीं है। सच्चे मन से की गई छोटी पूजा भी बहुत प्रभाव डालती है।

घर पर स्कंदमाता पूजा करने की पूरी विधि:

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें

  • साफ कपड़े पहनें

  • माँ की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें

  • कमल का फूल या कोई भी सुगंधित फूल अर्पित करें

  • दीपक जलाएं

  • मंत्र का जाप करें

  • अंत में भोग अर्पित करें

पूजा करते समय मोबाइल या अन्य चीज़ों से दूर रहना बेहतर रहता है, ताकि मन पूरी तरह से जुड़ा रहे।

स्कंदमाता की पूजा का सही समय और विधि

सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है। खासकर सूर्योदय के बाद का समय, जब वातावरण शांत होता है और मन जल्दी एकाग्र होता है। अगर आप पूरे नियम नहीं निभा पा रहे हैं, तो भी चिंता की बात नहीं है। नियमितता और श्रद्धा सबसे ज्यादा मायने रखती है।

स्कंदमाता का भोग और मंत्र क्या है

माँ स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।

मंत्र:

ॐ देवी स्कंदमातायै नमः

इस मंत्र का जाप करने से मन में स्थिरता आती है और धीरे-धीरे नकारात्मक विचार कम होने लगते हैं।

स्कंदमाता की पूजा से क्या लाभ होते हैं

इस दिन की पूजा का असर सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी दिखाई देता है।

  • मन शांत होता है

  • आत्मविश्वास बढ़ता है

  • परिवार में तालमेल बेहतर होता है

  • काम में ध्यान बढ़ता है

कई बार लोग कहते हैं कि पूजा के बाद उनके निर्णय पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गए। यह बदलाव धीरे-धीरे आता है, लेकिन टिकाऊ होता है। जिन लोगों को ज्योतिष को समझने की इच्छा है, वे online astrology classes के माध्यम से इसे व्यवस्थित तरीके से सीख सकते हैं और अपने जीवन में लागू कर सकते हैं।

जीवन में जब उलझन ज्यादा बढ़ जाए और खुद से जवाब न मिलें, तब एक सही दिशा बहुत जरूरी होती है। ऐसे समय में online consultation लेकर आप अपनी स्थिति को बेहतर समझ सकते हैं। और अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपके जीवन में कौन-से समय बदलाव लाएंगे, तो एक personalized Kundali आपको गहराई से समझ दे सकती है। Asttrolok Institute, जिसकी स्थापना Mr. Alok Khandelwal ji ने की है, आज हजारों लोगों को सही दिशा देने का काम कर रहा है।

विशेष सुझाव

कभी ध्यान दिया है, पूजा करते समय मन इधर-उधर भटकता रहता है? यह बहुत सामान्य है। इसे रोकने के लिए एक छोटा सा तरीका अपनाएं पूजा के बाद 5 मिनट शांत बैठें और अपनी सांसों पर ध्यान दें। धीरे-धीरे मन स्थिर होने लगेगा और आपको अपने सवालों के जवाब खुद मिलने लगेंगे। एक और छोटी बात पूजा को बोझ न बनाएं। इसे अपने दिन का शांत और सुकून भरा समय बनाएं। जब यह आदत बन जाएगी, तो इसका असर आपके व्यवहार और सोच दोनों में दिखेगा।

निष्कर्ष

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन हमें यह सिखाता है कि जीवन में संतुलन कितना जरूरी है। माँ स्कंदमाता का आशीर्वाद केवल पूजा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हमारे सोचने और समझने के तरीके को भी बदल देता है।

अगर आप इस ज्ञान को और गहराई से समझना चाहते हैं, तो Asttrolok Institute आपके लिए एक बेहतरीन जगह है, जहाँ Mr. Alok Khandelwal ji के मार्गदर्शन में आप ज्योतिष को सही तरीके से सीख सकते हैं और अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकते हैं।

सामान्य प्रश्न

  1. नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें, माँ की तस्वीर स्थापित करें, दीपक जलाएं, फूल अर्पित करें और “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का जाप करें। अंत में भोग लगाएं और शांत मन से प्रार्थना करें।

  1. स्कंदमाता की पूजा का सही समय क्या है?

सुबह सूर्योदय के बाद का समय सबसे शुभ माना जाता है। इस समय वातावरण शांत रहता है और ध्यान लगाना आसान होता है।

  1. स्कंदमाता की पूजा से क्या लाभ होते हैं?

इस पूजा से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। व्यक्ति के अंदर निर्णय लेने की क्षमता भी बेहतर होती है।

  1. स्कंदमाता का भोग क्या लगाना चाहिए?

माँ स्कंदमाता को केले का भोग विशेष प्रिय है। आप मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं।

  1. स्कंदमाता की कथा क्या सिखाती है?

यह कथा सिखाती है कि सही मार्गदर्शन और धैर्य से किसी भी कठिन परिस्थिति को पार किया जा सकता है।

  1. क्या घर पर स्कंदमाता की पूजा की जा सकती है?

हाँ, घर पर सरल विधि से पूजा की जा सकती है। सबसे जरूरी है मन की श्रद्धा और ध्यान।

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