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Shree Annapurna Stotram | श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम्

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श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् देवी अन्नपूर्णा की कृपा और समृद्धि का स्तुति-संग्रह है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र (Venus) या बुध (Mercury) कमजोर हैं और जीवन में भोजन, धन या समृद्धि की कमी है,
तो अन्नपूर्णा स्तोत्रम् का पाठ लाभकारी है।

Shri Annapurna Stotram is a hymn of nourishment, abundance and divine prosperity. If Venus or Mercury is weak in your horoscope and you seek wealth, food stability, For household prosperity, reciting this stotram brings positive results. Download Free PDF


1. श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् किसके द्वारा लिखा गया है?

यह स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। इस स्तुति में माता अन्नपूर्णा के दैवी स्वरूप- अक्षय अन्न, कृपा, पोषण, धन-लक्ष्मी और जीवन-संतुलन- का अत्यंत मधुर वर्णन किया गया है। स्त्रोतों में यह “अन्नपूर्णा स्तुति” और “अन्नपूर्णा शंकर स्तुति” नाम से भी प्रसिद्ध है।


2. श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् किस देवी को समर्पित है?

● श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् मुख्य रूप से देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है, जिन्हें भोजन, धन, पोषण, दया और जीवन-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

● इसका मूल विषय है-
“माता अन्नपूर्णा ही संसार का पोषण, धन-संपदा, अन्न-कृपा और गृह-शांति प्रदान करती हैं।”
उनकी कृपा से जीवन में भोजन, धन और स्थिरता कभी समाप्त नहीं होती।


3. श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् वास्तु और ज्योतिष (Astrology, Horoscope) में क्या मदद करता है?

● जब आपकी कुंडली में शुक्र (Venus) कमजोर हो, तब धन की कमी, रिश्तों में तनाव, घर में सुख-सुविधाओं की कमी, और वित्तीय अस्थिरता दिखाई देती है। श्री अन्नपूर्णा स्तोत्र शुक्र को बल प्रदान कर समृद्धि, सुंदरता, सौभाग्य और धन-संतुलन देता है।

● जब आपकी कुंडली में बुध (Mercury) कमजोर हो, तब लेन-देन की समस्याएँ,  वाणिज्य बाधाएँ, आर्थिक भ्रम, और घर-परिवार की योजना में कठिनाई होती है। श्री अन्नपूर्णा स्तोत्र बुध को संतुलित कर बुद्धि, व्यापार, व्यवस्था और आर्थिक वृध्दि प्रदान करता है।

● वास्तु-ज्योतिष की दृष्टि से यह स्तोत्र उन परिस्थितियों में उपयोगी है जहाँ व्यक्ति धन-अभाव, अन्न-कमी, गृह-कलह या आर्थिक तनाव से मुक्त होना चाहता हो।



4. श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् किसको पढ़ना चाहिए – जिससे उन्हें मदद मिले?

● वे लोग जिनकी कुंडली में शुक्र या बुध ग्रह प्रभावित या कमजोर स्थिति में हों, विशेष रूप से जो धन, भोजन या गृह-समृद्धि में कठिनाई अनुभव कर रहे हों।

● जिनका जीवन आर्थिक उतार-चढ़ाव, गृह कलह, व्यापारिक समस्याएँ, या धन-संचय में बाधा से ग्रस्त हो -उनके लिए यह पाठ अत्यंत लाभकारी है।

● गृहस्थ, साधक, व्यापारी, गृहिणी और वे सभी लोग जो घर में भोजन, शांति, स्थिरता और समृद्धि चाहते हों -
उनके लिए यह स्तोत्र अत्यंत उपयुक्त है।

● सामान्य रूप से -जिनके जीवन में धन, भोजन, गृह-शांति या समृद्धि की कमी हो - वे श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् के नियमित पाठ से गहरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।


5. व्याख्या

● स्तोत्र की आरंभिक पंक्ति देवी अन्नपूर्णा की कृपा, पोषण और करुणा को प्रकट करती हैं- 

“अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥”

अर्थात -“हे अन्नपूर्णा, जो सदा पूर्ण और अखंड कृपा से युक्त हैं, हे शंकर की प्राणवल्लभा पार्वती,
मुझे ऐसी भिक्षा दें जिससे ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि हो।”

● आगे एक अन्य श्लोक आता है- 

“नित्यानंदकरी वराभयकरी सौंदर्यरत्नाकरि।
निर्धूताखिलघोरपावनकरी काशिपुराधीश्वरी॥”

अर्थ -“आप नित्य आनंद देने वाली, वरदान तथा अभय प्रदान करने वाली, सौंदर्य की रत्नाकर, और सभी पापों को नष्ट करने वाली काशीपुर की अधीश्वरी हैं।”

● इन श्लोकों का सार यही है कि माता अन्नपूर्णा केवल अन्न ही नहीं देतीं, बल्कि धन, सुख, शांति, ज्ञान, स्थिरता और सफलता भी प्रदान करती हैं।

● स्तोत्र यह संदेश देता है कि देवी ही वह शक्ति हैं  जो घर में अन्न-कमी, धन-अभाव, कलह, अस्थिरता और मानसिक तनाव को दूर करती हैं और जीवन में समृद्धि, संतोष और सौभाग्य लाती हैं।

● मूल भाव यह है-अन्न ही ब्रह्म है और देवी अन्नपूर्णा उस ब्रह्म-शक्ति का मूर्त स्वरूप हैं।  उनके स्मरण से शरीर, मन, परिवार और गृहस्थ जीवन में पूर्णता आती है।


निष्कर्ष:

यदि आप जीवन में धन, अन्न, गृह-शांति, आर्थिक स्थिरता, सौभाग्य और समृद्धि चाहते हैं - और विशेष रूप से यदि आपकी कुंडली में शुक्र या बुध ग्रह प्रभावित हों -तो श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् का नियमित पाठ आपको अत्यंत शुभ, सौभाग्यशाली और संपन्न परिणाम देता है।

भक्ति-भाव से इसका जप करें, विनम्रता से प्रार्थना करें और अपने जीवन, परिवार और गृहस्थी को माता अन्नपूर्णा की कृपा में समर्पित करें।

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