दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् भगवान दत्तात्रेय के 108 दिव्य नामों का पवित्र स्तोत्र है, जिसमें उनकी अनंत शक्तियों, ज्ञान और संरक्षण का गुणगान किया गया है। यह स्तोत्र साधक को मानसिक स्पष्टता, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और ऊर्जा-संतुलन प्रदान करता है। वैदिक ज्योतिष में यह स्तोत्र विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है जब आपकी कुंडली में सूर्य (Surya) या बुध (Budh) कमजोर हों। इन ग्रहों की कमजोरी आत्मविश्वास, संचार क्षमता और बौद्धिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है। इस स्तोत्र का जप इन ग्रहों की सकारात्मक शक्ति को बढ़ाता है। Dattatreya Ashtottara Shatanama Stotram is a spiritual hymn composed of 108 divine names of Lord Dattatreya. If Sun or Mercury is weak in your horoscope and you experience confusion, lack of confidence or weak intellect, chanting this stotram enhances clarity, focus and divine protection. Download Free PDF. यह स्तोत्र भगवान दत्तात्रेय की उपासना का महान स्रोत है और विभिन्न दत्त संप्रदाय आचार्यों तथा वैदिक परंपराओं द्वारा संकलित माना जाता है। इसमें दत्तात्रेय के त्रिदेव स्वरूप - ब्रह्मा, विष्णु और महेश - के गुणों का विस्तारपूर्वक उल्लेख है। उनके 108 नाम साधक को ज्ञान, बल, संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण प्रदान करते हैं। ● दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र भगवान दत्तात्रेय को समर्पित है, जो त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश- का संयुक्त अवतार हैं। ● यदि जन्मकुंडली में सूर्य कमजोर हो तो व्यक्ति आत्मविश्वास, नेतृत्व, जीवन-ऊर्जा और निर्णय क्षमता में कमी महसूस करता है। यह स्तोत्र सूर्य को मजबूत कर आत्मविश्वास और ऊर्जा प्रदान करता है। ● वे लोग जिनकी कुंडली में सूर्य या बुध ग्रह कमजोर हों। ● स्तोत्र की प्रारंभिक पंक्ति - “ॐ दत्तात्रेयाय नमः” ● आगे आता है - “ॐ योगिश्वराय नमः” ● इन नामों का सार यह है कि दत्तात्रेय साधक को अज्ञान, भय, भ्रम और मानसिक दबाव से मुक्त कर ज्ञान, शक्ति और आध्यात्मिक जागरण प्रदान करते हैं। यदि आपकी कुंडली में सूर्य या बुध ग्रह प्रभावित हों, या आप मानसिक भ्रम, दिशा की कमी, आत्मविश्वास की कमी या आध्यात्मिक कमजोरी महसूस कर रहे हों- तो दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् का नियमित जप आपको आंतरिक शक्ति, मानसिक स्पष्टता, विवेक, साहस और दिव्य संरक्षण प्रदान करता है। भक्ति-भाव से दत्तात्रेय का स्मरण करें, ताकि आपके भीतर दिव्य चेतना, शक्ति और शांति का प्रकाश जाग्रत हो सके। याद रखें -आप हमारे Courses को जॉइन करे और बिल्कुल सरल भाषा में और श्रेष्ठ ज्योतिषाचार्यों के मार्गदर्शन के द्वारा Astrology, Horoscope, Ayurveda, Numerology, Palmistry और Vastu सब आसानी से सीख सकते हैं। Asttrolok.com You can join our courses and easily learn Astrology, Horoscope, Ayurveda, Numerology, Palmistry, and Vastu in a very simple and easy-to-understand way, guided by our expert and highly experienced astrologers. | Asttrolok.com1. दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् किसके द्वारा लिखा गया है?
2. दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् किन-किन स्वरूपों को समर्पित है?
● इसमें दत्तात्रेय को “योगेश्वर”, “अवधूत”, “ज्ञानसागर”, “जगत्पालक” और “सर्वशक्तिमान” रूप में वर्णित किया गया है।
● उनके प्रत्येक नाम में उनके दिव्य स्वरूप, योग-सिद्धि, करुणा और संरक्षण शक्ति का वर्णन है।3. दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् वास्तु और ज्योतिष में क्या मदद करता है?
● यदि जन्मकुंडली में बुध कमजोर हो तो संचार-शक्ति, बुद्धि, व्यापारिक विवेक, स्मरणशक्ति और मानसिक संतुलन प्रभावित होते हैं। दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र बुध-दोष को शांत कर बुद्धि और संवाद शक्ति बढ़ाता है।
● वास्तु-ज्योतिष की दृष्टि से दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र उन लोगों के लिए अत्यंत प्रभावी है जो मानसिक दबाव, कार्य रुकावट, जीवन-दिशा की कमी या निर्णय भ्रम का अनुभव करते हैं।4. दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् किसे पढ़ना चाहिए?
● जो लोग ध्यान, एकाग्रता, बुद्धि-विकास या मानसिक शक्ति चाहते हों।
● विद्यार्थी, शोधकर्ता, व्यापारियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र अत्यंत कल्याणकारी है।
● सामान्य रूप से- जो भी व्यक्ति जीवन में दिशा, शांति, विवेक, सुरक्षा और आध्यात्मिकता चाहता है, उसे दत्तात्रेय अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र अवश्य करना चाहिए।5. व्याख्या
अर्थ: “त्रिदेव स्वरूप दत्तात्रेय को प्रणाम जो ज्ञान, शक्ति और संरक्षण के परमदाता हैं।”
अर्थ: “जो योग के ईश्वर हैं और सभी योग सिद्धियों के अधिष्ठाता हैं।”
● अष्टोत्तरशतनाम यह सिखाता है कि दत्तात्रेय की उपासना मानसिक स्थिरता, बुद्धि-विकास, साहस और आंतरिक शक्ति को प्रकट करती है।
● मूल भाव: “दत्तात्रेय ही गुरु, ज्ञान और दिव्य संरक्षण के आधार हैं।”निष्कर्ष