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Chandra Ashtottar Shat Namavali | चन्द्र अष्टोत्तर शत नामावली

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Chandra Ashtottar Shat Namavali | चन्द्र अष्टोत्तर शत नामावली Free PDF Download


चंद्र अष्टोत्तर शत नामावली में चंद्रदेव के 108 दिव्य नामों का वर्णन मिलता है। चन्द्र अष्टोत्तर नामावली भावनात्मक संतुलन, अंतर्ज्ञान, करियर में सफलता और दांपत्य जीवन में सुख–समृद्धि प्रदान करती है। चन्द्र अष्टोत्तर शत नामावली विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए लाभकारी है जो राहु–मंगल युति, चंद्र–मंगल संयोजन या मध्य / अन्त्य नाड़ी दोष से प्रभावित होते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से, इस नामावली का पाठ ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत करने, नाड़ी दोष को दूर करने और कुंडली में चंद्र की प्रतिकूल स्थिति को संतुलित करने में अत्यंत प्रभावी माना जाता है। इसके नियमित जप से करियर, धन, संबंधों और मानसिक स्पष्टता में सुधार होता है। यह नामावली ऑनलाइन ज्योतिष कोर्स, नाड़ी दोष निवारण, वास्तु सुधार और राहु–मंगल युति के समाधान में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है।

Chandra Ashtottar Shat Namavali lists 108 divine names of the Moon, invoking blessings for emotional balance, intuition, career success, and marital happiness. This Namavali is especially beneficial for those suffering from Rahu-Mangal Yuti, Moon-Mars conjunctions, or Madhya/Antya Nadi dosha. Download Free PDF.


1. चन्द्र अष्टोत्तर शत नामावली किसके द्वारा लिखी गई है?

चंद्रदेव की यह नामावली ब्रह्मवैवर्त पुराण, चंद्रोपासना ग्रंथ और प्राचीन वैदिक कथाओं में वर्णित है। इसे ऋषि–मुनियों ने चंद्रदेव की शीतलता, सौम्यता और मन–स्थिर करने वाली ऊर्जा को जागृत करने के उद्देश्य से रचा। चंद्रदेव मन, भावनाएँ, मातृत्व, प्रेम, सौंदर्य, शांति और अंतर्ज्ञान के अधिपति हैं। 108 नाम चंद्रदेव की सभी दिव्य शक्तियों का संकलन हैं।


2. चन्द्र अष्टोत्तर शत नामावली चंद्रदेव के किन स्वरूपों को समर्पित है?

चन्द्र अष्टोत्तर नामावली चंद्रदेव के कई पवित्र और सौम्य स्वरूपों को समर्पित है-
सौम्य -  शांति और सौम्यता के प्रतीक
कलानाथ -  कला और रचनात्मकता के स्वामी
शशिभूषण -  शिव के मस्तक पर सुशोभित चंद्र
रोहिणीप्रिय -  प्रेम, आकर्षण और सौंदर्य के दाता
मनोज्ञ -  मन को आनंदित करने वाले
शुभप्रद -  सौभाग्य और मानसिक सुख देने वाले

इन 108 नामों में चंद्रदेव की शांत, सौम्य, प्रेमपूर्ण और भावनात्मक ऊर्जा का सार निहित है।


3. चन्द्र अष्टोत्तर शत नामावली वास्तु और ज्योतिष (Astrology) में क्या मदद करती है?

यदि कुंडली में चंद्र कमजोर, पापग्रस्त या राहु–मंगल, शनि या केतु के प्रभाव में हो, तो मन, भावनाएँ, संबंध, स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता प्रभावित होती है।
इस नामावली के जप से-
● मानसिक तनाव और अस्थिरता कम होती है
● चंद्र–मंगल दोष और राहु–मंगल युति शांत होती है
● नाड़ी दोष (मध्य / अन्त्य) में संतुलन आता है
● वैवाहिक संबंधों में सौहार्द बढ़ता है
● अंतर्ज्ञान और रचनात्मकता में वृद्धि होती है
● स्वास्थ्य, नींद और मानसिक स्थिरता में सुधार होता है
● परिवार और माता संबंधी दोष शांत होते हैं
● करियर और शिक्षा में मन स्थिर होता है

वास्तु में, यदि मुख्य द्वार के सामने सीढ़ियाँ या स्टेप्स हों या घर में अस्थिरता, तनाव या भावनात्मक असंतुलन हो, तो इस नामावली का जप चंद्र ऊर्जा को संतुलित कर घर–परिवार में शांति और सौहार्द स्थापित करता है।

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4. चन्द्र अष्टोत्तर शत नामावली किसे पढ़ना चाहिए जिससे उन्हें मदद मिले?


चन्द्र अष्टोत्तर नामावली उन लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो मानसिक तनाव, भावनात्मक अस्थिरता, नाड़ी दोष, चंद्र–मंगल दोष, राहु–मंगल युति, नींद की समस्या, वैवाहिक तनाव या परिवारिक असंतुलन का सामना करते हैं। यह चंद्र ऊर्जा को शांत कर मन, संबंधों और जीवन में स्थिरता, प्रेम और शांति स्थापित करती है।

● जिनकी कुंडली में चंद्र कमजोर या पापग्रस्त हो।
● जो मानसिक बेचैनी, भय, तनाव या भावनात्मक असंतुलन से पीड़ित हों।
● जिन्हें चंद्र–मंगल या राहु–मंगल के दोष परेशान करते हों।
● जिनके संबंधों, विवाह या परिवार में गलतफहमियाँ या तनाव हो।
● जो नाड़ी दोष (मध्य / अन्त्य) से प्रभावित हों।
● विद्यार्थी, कलाकार, गृहस्थ और आध्यात्मिक साधक।
● जो अंतर्ज्ञान, मानसिक शक्ति और सकारात्मकता बढ़ाना चाहते हों।

Astrologically, chanting helps mitigate planetary malefic effects, nadi dosha, and unfavorable Moon placements in kundali, enhancing career, wealth, relationships, and mental clarity. It is widely used in online astrology courses, nadi dosha remedies, vastu corrections, and Rahu-Mangal Yuti solutions.


5. व्याख्या

“ॐ सोमाय नमः”
अर्थ -  शांति और सौम्यता के दाता चंद्रदेव को नमन।

“ॐ कलाधराय नमः”
अर्थ -  कला, रचनात्मकता और सौंदर्य के स्वामी चंद्रदेव को प्रणाम।

“ॐ शशांकाय नमः”
अर्थ -  उज्ज्वल चंद्र, जो अपनी शीतल किरणों से संसार का कल्याण करते हैं।

इन नामों का सार यह है कि चंद्रदेव मन, भावनाओं, प्रेम और शांति का स्रोत हैं।


निष्कर्ष

यदि आपकी कुंडली में चंद्र कमजोर हो, या राहु–मंगल युति, चंद्र–मंगल दोष, नाड़ी दोष, भावनात्मक तनाव, नींद की कमी, संबंधों में तनाव या पारिवारिक असंतुलन हो- तो चंद्र अष्टोत्तर शत नामावली का नियमित पाठ
मन, भावनाओं और संबंधों में स्थिरता, शांति और सौभाग्य लाता है।


चंद्रदेव की कृपा से मानसिक स्पष्टता, प्रेम, आकर्षण और स्थिरता बढ़ती है।


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