बृहस्पति अष्टोत्तर शतनामावली भगवान बृहस्पति की महिमा का वर्णन करती है और उनके 108 पवित्र नामों के माध्यम से ज्ञान, धन और सौभाग्य देने वाले गुरु ग्रह की शक्ति को प्रकट करती है। इसका नियमित जप गुरु ग्रह की शुभता बढ़ाता है, राहु–मंगल युति से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करता है तथा मध्यम और अन्त्य नाड़ी की ऊर्जा को संतुलित करता है। यह नामावली आर्थिक समृद्धि, करियर में उन्नति, आध्यात्मिक ज्ञान और वैवाहिक स्थिरता के लिए एक प्रभावी वैदिक उपाय है। विशेष रूप से उन जातकों के लिए लाभकारी है जिनकी कुंडली में द्वितीय, षष्ठ या द्वादश भाव में मंगल, शनि की दृष्टि या राहु–मंगल युति हो।
Brahaspati Ashtottar Shat Naam Namavali glorifies Lord Jupiter, the planet of wisdom, wealth, and fortune, through 108 sacred names. Reciting it strengthens Jupiter’s influence, remedies Rahu-Mangal Yuti effects, and balances madhya and antya nadi energies.
बृहस्पति अष्टोत्तर शत नामावली का उल्लेख स्कंद पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और कई वैदिक ज्योतिष ग्रंथों में मिलता है। यह स्तोत्र ऋषि–मुनियों द्वारा गुरु बृहस्पति की दिव्यता, ज्ञान, धर्म, शुद्धता और ब्रह्मांडीय व्यवस्था में उनकी भूमिका को दर्शाने हेतु रचा गया है। गुरु बृहस्पति देवताओं के आचार्य और ज्ञान, विवाह, संतान, समृद्धि तथा भाग्य के कारक माने जाते हैं। इस नामावली में उनके 108 स्वरूपों का विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है।
बृहस्पति अष्टोत्तर शत नामावली गुरु ( बृहस्पति ) के कई दिव्य और शुभ स्वरूपों का स्तुति-संग्रह है-
● गुरु - ज्ञान, बुद्धि और धर्म के अधिष्ठाता
● बृहस्पति - देवताओं के आचार्य
● सुकेतु - शुभ मार्गदर्शक
● सुराचार्य - देवों के शिक्षक
● वाचस्पति - ज्ञान और वाणी के स्वामी
● दीर्घदर्शी - दूरदर्शी और विवेकी
● विष्णुभक्त - सत्य, धर्म और सदाचरण के प्रतीक
● शुचि–स्वरूप - पवित्रता और सात्त्विकता के रूप
108 नाम गुरु के ज्ञान, सात्त्विकता, विवेक, धर्म, भाग्य और समृद्धि स्वरूपों को प्रकट करते हैं।
यदि आपकी कुंडली में गुरु (Jupiter) कमजोर, पीड़ित या नीचस्थ हो, या गुरु पर राहु/केतु, शनि या मंगल का अशुभ प्रभाव हो, तो यह नामावली ग्रह-ऊर्जा को संतुलित करने का एक सशक्त उपाय है। यह विशेष रूप से तब लाभ देती है जब द्वितीय, षष्ठ या द्वादश भाव में मंगल स्थित हो, जन्मकुंडली में राहु–मंगल युति हो, या शनि की दृष्टि गुरु को प्रभावित कर रही हो।
बृहस्पति अष्टोत्तर शत नामावली के जप से-
● आर्थिक स्थिरता और धन-वृद्धि
● करियर में नए अवसर
● विवाह और दांपत्य जीवन में स्थिरता
● शिक्षा और ज्ञान में वृद्धि
● भाग्य का सुदृढ़ होना
● नाड़ी दोष में राहत
● मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक उन्नति
जैसे लाभ प्राप्त होते हैं।
वास्तु के अनुसार, यह नामावली घर में पवित्रता, सत्य, प्रकाश और शुद्ध ऊर्जा का संचार करती है।
This Namavali is a Vedic remedy for financial prosperity, career growth, spiritual learning, and marital stability. It is particularly beneficial for those with Mars in the 2nd, 6th, or 12th house, Saturn aspects, or Rahu-Mangal Yuti in the horoscope.
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● जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर, पीड़ित या असंतुलित हो।
● जिनके जीवन में विवाह, शिक्षा, करियर या संतान संबंधी समस्याएँ हों।
● जो बुद्धि, सत्य, ज्ञान और विवेक बढ़ाना चाहते हों।
● जो आर्थिक रुकावट, करियर कठिनाई या अवसरों की कमी का अनुभव कर रहे हों।
● जिन पर राहु–मंगल युति, शनि दृष्टि या नाड़ी दोष का प्रभाव हो।
● विद्यार्थी, शिक्षक, आध्यात्मिक साधक और गृहस्थ- सभी के लिए लाभकारी।
“ॐ गुरवे नमः”
अर्थ - “ज्ञान और धर्म के अधिष्ठाता गुरु को नमन।”
“ॐ वाचस्पतये नमः”
अर्थ - “ज्ञान, वाणी और सत्य के स्वामी को प्रणाम।”
“ॐ दिविजाचार्याय नमः”
अर्थ - “देवताओं के आचार्य बृहस्पति को नमन।”
“ॐ शुभदाय नमः”
अर्थ - “शुभता, सौभाग्य और समृद्धि देने वाले गुरुदेव को प्रणाम।”
इन नामों का सार यह है कि गुरु बृहस्पति जीवन में ज्ञान, विवेक, सत्य, धर्म, धन, समृद्धि और सौभाग्य का स्रोत हैं।
यदि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर या पीड़ित हो, या आप आर्थिक संघर्ष, करियर रुकावटें, शिक्षा संबंधी कठिनाइयाँ, विवाह समस्याएँ या राहु–मंगल/नाड़ी दोष का प्रभाव झेल रहे हों- तो बृहस्पति अष्टोत्तर शत नामावली का नियमित जप आपके जीवन में ज्ञान, समृद्धि, भाग्य, शांति और स्थिरता बढ़ाता है। गुरु बृहस्पति की कृपा से जीवन में प्रगति, शांति और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त होता है।
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