आनन्द लहरी स्तोत्र माँ पार्वती तथा भगवान् शिव के आनंदमय स्वरूप का दिव्य मंत्र-पाठ है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र (Venus) या चंद्र (Moon) ग्रह कमजोर हैं और जीवन में शांति, प्रेम या सौंदर्य की कमी महसूस हो रही है - तो इस स्तोत्र का नियमित पाठ अत्यंत शुभ एवं लाभदायी माना गया है।
Aanand Lahari Shlok describes the blissful form of Goddess Parvati and Lord Shiva. If Venus or Moon is weak in your horoscope, and you face lack of peace, love, or beauty in life, reciting this shloka regularly brings auspicious results. Download Free PDF
यह स्तोत्र मंत्र-ग्रन्थ आदि-शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। आनन्द लहरी वास्तव में सौन्दर्य लहरी का प्रथम भाग है - जिसमें पहले 41 स्तोत्र “आनन्द लहरी” कहलाते हैं।
यह स्तोत्र विशेष रूप से देवी शक्ति / माँ पार्वती के रूप में समर्पित है - जो आनंद, सौंदर्य, चेतना की देवी हैं।
साथ ही इसमें भगवान् शिव के साथ देवी पार्वती के एकात्मक स्वरूप अर्थात् शिव-शक्ति की अवधारणा का वर्णन है - जो आनंद और चेतना के स्रोत हैं।
यदि आपके जीवन में शुक्र या चंद्र ग्रह कमजोर हों, तो यह स्तोत्र विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है - क्योंकि शुक्र से सम्बन्धित हैं प्रेम, सौंदर्य, समृद्धि तथा चंद्र से सम्बन्धित हैं मन, भाव-प्रकृति, मानसिक शांति।
इस स्तोत्र के नियमित पाठ से मानसिक अस्थिरता, प्रेम-भाव की कमी, सौंदर्य-ज्ञान में कमी, जीवन-शैली में अनायास परिवर्तन जैसी बाधाएँ कम हो सकती हैं।
वास्तु-ज्योतिष के दृष्टिकोण से - जब जीवन-मार्ग में सौंदर्य-भाव, आन्तरिक शांति, भक्ति-भाव, प्रेम-संबंध आदि कमजोर हों - ऐसे में यह स्तोत्र “भीतर से शांति”, “सौंदर्य की अनुभूति”, “आनंद-वृद्धि” का उपाय बन सकता है।
वे लोग जिनकी कुंडली में शुक्र या चंद्र ग्रह कमजोर हों, और जिनका जीवन-मार्ग प्रेम-संबंध, सौंदर्य-चिंतन, मानसिक शांति या संवेदनशीलता की कमी से प्रभावित हो रहा हो।
जिनका मन अशांत है, जीवन-में आनंद की कमी है, अथवा सौंदर्य-प्रवृत्ति, कला-रुचि, तब मानसिक शांति विकसित नहीं हो पा रही हो।
भक्त जो माँ पार्वती एवं भगवान् शिव की एकात्म स्वरूप में भक्ति करना चाहते हों - उन्हें इस स्तोत्र का नियमित पाठ लाभदायी होगा।
सामान्य रूप से - जिनका जीवन-मार्ग प्यार, सौंदर्य, आन्तरिक शांति, संवेदनशीलता में कहीं अटका हुआ हो, उन्हें यह स्तोत्र अपनाना चाहिए।
“आनन्द लहरी” का अर्थ है “आनंद की लहर” - अर्थात् शक्ति-स्वरूप देवी से निकलने वाली आनंदमय ऊर्जा-धारा।
इस स्तोत्र में उस आनंद-स्वरूप देवी का वर्णन है - जो न सिर्फ रूप-सौंदर्य की देवी हैं बल्कि चेतना, जागृति, आनंद की स्रोत भी हैं।
स्तोत्र यह सिखाता है कि जब मन, भाव और प्रेम-चिंतन में स्थिरता नहीं होती - तब इस दिव्य आनंद-लहरी में डूबने से मानव-स्वभाव शांत होता है, सौंदर्य का अनुभव बढ़ता है और संवेदनशीलता खुलती है।
यह पाठ सिर्फ भौतिक-सौंदर्य का नहीं, बल्कि आन्तरिक चेतना-सौंदर्य और प्रेम-माधुर्य का है। जब मन शांत होता है, प्रेम-भाव जाग्रत होता है, तब जीवन-में सौंदर्य और आनंद स्व-प्रकाशित रूप से आते हैं।
यदि आप अपने जीवन में शांति, प्रेम, सौंदर्य-भाव, आन्तरिक आनंद एवं आध्यात्मिक जागृति चाहते हैं - और विशेष रूप से यदि आपके ज्योतिषीय में शुक्र या चंद्र ग्रह प्रभावित हों - तो “आनन्द लहरी” का नियमित पाठ एक सार्थक उपाय बन सकता है।
भक्ति-भाव एवं संवेदनशीलता के साथ इसे पढ़ें, अर्थ को समझें, मन को देवी-शक्ति की ओर लगाएँ - और उसके बाद फलस्वरूप अपने जीवन-मार्ग में सकारात्मक बदलाव की आशा रखें।
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